स्याह-सफ़ेद

क्राईम फिक्शन विद डेविड फ्रांसिस सीरीज़ की अगली कड़ी में यह ‘सिकारियो’ के बाद नवां उपन्यास है— जो प्रकाशित हो रहा है और इसके साथ ही उन शुरुआती कहानियों के सिलसिले का अंत हो रहा है, जिन्हें फिज़ी, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया के तटों पर रहते इस सीरीज़ के केंद्रीय किरदार डेविड फ्रांसिस द्वारा अपनी आत्मकथा के रूप में कलमबद्ध किया जा रहा है— यानि डेविड की भाषा में उसके वे कारनामे, जिन्हें वह अपने कांड के रूप में याद करता है।

सीरीज के क्रम में दसवें नंबर की ‘डेढ़ सयानी’ पहले ही प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें डेविड बतौर किरदार पूरी तरह तैयार हो चुका है— पक चुका है। वह उस मयार के आसपास पहुंच चुका है जहां उसके अपने आइडियल किताबी किरदार पाये जाते हैं— लेकिन उस मकाम तक पहुंचने का सफ़र उन नौ कहानियों में दर्ज है, जो वह अपने अतीत को स्मरण करते हुए पन्नों पर उकेर रहा है। शुरुआती दो कहानियां ‘काया पलट’ और ‘ए डैमसेल इन डिस्ट्रेस’ उसने फिज़ी में रहते दर्ज की थी, बाद की चार कहानियां ‘डार्क साइड’, ‘ओरका केरास्टा’, ‘साइको सिमोन’ और ‘द ब्लडी मानसून’ न्यूजीलैंड में रहते दर्ज की थी और ‘सिकारियो’ के बाद अब यह नवीं कहानी वह आस्ट्रेलिया में रहते दर्ज कर रहा है।

‘स्याह-सफ़ेद’ उसके पाकिस्तान सफ़र की कहानी है। एक ऐसा देश, एक ऐसी ज़मीन, जहां भारतीय पासपोर्ट रखते हुए कुछ भी करना आसान नहीं था— भले आप दिखने में अंग्रेज़ क्यों न लगते हो। एक ज़रा सी ग़लती सुरक्षा एजेंसियों को आपके खिलाफ़ सतर्क कर सकती है और फिर आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं— लेकिन वह डेविड ही क्या, जो ख़ुद को ऐसी ग़लती करने से रोक ले।

मैक्सिको से निकल कर कनाडा में एक लंबा वक़्त शांत और लगभग निष्क्रिय रहने के बाद वह कनाडा में बने एक पाकिस्तानी दोस्त के साथ उसके घर पेशावर आता है और पेशावर पहुंचने के कुछ ही दिन बाद वह ‘डैमसेल इन डिस्ट्रेस’ की अपनी पुरानी खोज पर लौट आता है— जो उसे जानलेवा संकट तो देती थी, लेकिन साथ ही उसे वह किक भी देती थी जिसकी उसे हमेशा तलाश रहती थी… और यहीं से शुरू होता है ‘स्याह-सफ़ेद’ नाम का यह कांड।

पेशावर या पाकिस्तान उसकी उम्मीद से कहीं ज्यादा ख़तरनाक था— उस मैक्सिको से भी ज्यादा, जहां किसी को बचाने के चक्कर में ख़ुद उसकी जान बचनी मुश्किल हो गई थी। पाकिस्तान का दौरा उसकी ज़िंदगी में तब तक के दौरों में सबसे ख़तरनाक दौरा था— जहां नौबत यह तक आ गई थी कि एक वांटेड अपराधी के तौर पर उसे अवैध रूप से सरहद पार करनी पड़ी थी।

जिस औरत की मदद के चक्कर में वह इस बार कूदा था, वह ख़ुद ही साज़िशकर्ताओं में शामिल थी— और पर्दे के पीछे जो खेल वहां चल रहा था, वहां लगभग हर किरदार एक दोहरा चरित्र रखता था। वह सामने से किसी और के लिये समर्पित दिखता था, लेकिन उसके अंदर कुछ और चल रहा था। लोगों के किरदार और उनकी बातें इतनी उलझी हुई थीं कि डेविड के लिये यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सच क्या था और झूठ क्या था।

एक औरत थी जो उससे यह मदद चाहती थी कि वह उसके बताये तरीके से उसके पति को ठिकाने लगा दे, ताकि उसे आज़ादी मिल सके। तीन सरकारी सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोग थे जो अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करते, लेकिन ख़ुद को उस मिशन के खिलाफ़ बताते हैं जो कश्मीर में किसी हमले का था— और डेविड की मदद से उस हमले को रोकने की उम्मीद करते हैं।

एक इस्लामिक स्टेट के खोरासान माड्यूल से जुड़ा एरिया कमांडर था जो अपने साथ ग़द्दारी करने वाले उस शख़्स की तलाश में था, जिसके कंधे पर उस हमले की ज़िम्मेदारी थी— लेकिन उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि वह ख़ुद कई निगाहों का केन्द्र बना हुआ है। एक ख़ुद को मज़लूम बताती औरत थी, जो डेविड को एक फ़र्जी कहानी में उलझा कर अपनी स्वार्थपूर्ति का साधन बना लेती है।

एक आईएसआई से जुड़ा शख़्स था जो अपनों में शामिल काली भेड़ों की तलाश में था और इस सिलसिले में डेविड को मोहरे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता था।

पेशावर से स्वात और कश्मीर तक फैली— आईएसआई, आर्मी, आईएसकेपी और टीटीपी के लोगों के बीच उलझी— ड्रग और वैपंस स्मगलिंग से ले कर आतंकी हमले और पैसों की लूट के बीच उलझी एक ऐसी कहानी, जो मैक्सिको के बाद डेविड के जीवन का सबसे बड़ा कांड बन गई थी। क्या था असल सच, जो पर्दों में छुपा था? क्या था वह असली मिशन, जिसमें कई लोग मोहरों की तरह इस्तेमाल हो रहे थे? क्या था उस पैसे का रोल, जो ढेरों जानें लेने वाला था— और क्या था यह ‘स्याह-सफ़ेद’? जानने के लिये पढ़िये।

Syah-Safed

Ashfaq Ahmad
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Published on May 02, 2026 20:04 Tags: books-by-ashfaq-ahmad
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