तुम ये क्या बना रहे हो चित्रकार?

चित्रकार ने तस्वीर में थोड़ी सी ठंडी हवा बनाई. 
बहुत सी खाली कुर्सियां, कुछ एक लोग, हल्की रौशनी, और हल्का इंतज़ार बनाया. गलबहियां डाले हुए एक टीन-एज जोड़ा बनाया. उस जोड़े के झरता बहुत सारा प्रेम उससे अधिक उत्तेजना और उससे अधिक अबखाई बनाई. 
कि दुनिया में बहुत कम जगहें बची थी निजता भरा प्रेम जीने की. 
चित्रकार ने और जो कुछ बनाया वह किसी सड़क किनारे रेस्तराओं का सिलसिला था. वहां लेम्प पोस्ट थे. उनपर धर्मेद्र और हेमा के जमाने की फिल्मों के पोस्टर लगे थे. चित्रकार ने अमिताभ का कोई पोस्टर न बनाया. इसलिए कि अपनी 'डैन' में आराम करते हुए राजेश खन्ना के चेहरे पर एक अफ़सोस रखा था कभी-कभी हम ऐसे लोगों का साथ दे देते हैं, जिनमें सिर्फ दूसरों के पाँव काटकर खुद के लिए सीढियाँ बनाने का हुनर होता है. 
चित्रकार ने एक इंतज़ार बनाया. जैसे रंग बनाने वाले बोर्ड पर नीले रंग की ओर बहता हुआ कोई और रंग. उसने टेबल के नीचे पैरों में हरकत बनायीं. उन हरकतों में छुअन भरी. छुअन में अपनापा बनाया. और जिस आदमी पर छुअन के छींटे बनाये उसी आदमी के चेहरे पर एक सवाल बनाया. कि काश तुम एक पारदर्शी रंग होते. 
चित्रकार थक गया होगा कि अचानक उसने विदा बनाई. 
धक्-धक्, धकड़-धकड़. हवा की सांय-सांय, रेल इंजन की विशल, सेलफोन, अँधेरा, और अनमनी करवटें. किसी ने कान में कहा- कैसा प्रेम? सेलफोन छुपाये, घबराए हुए आना. ये कैसा आवरण है. ये कैसी निजता है. ये असल में अजनबियत है. जो कहती है मेरी दुनिया में तुम एक कोना भर हो. तुम मेरी दुनिया नहीं हो. तुम समझते क्यों नहीं? 
धक्-धक्, धकड़-धकड़. शू. शा. शीई. 
ज़िन्दगी का बुरादा अपनी ही सांस में घुलता रहा. उसके पास देने के लिए भारी सांसों के सिवा कुछ नहीं था. अचानक, आधी रात के बाद एक झटके से रुक गया सब कुछ. कोई ठिकाना आया. 
क्या सबकुछ?
अचानक चित्रकार लौट आया. उसने एक तीन साल की नन्हीं लड़की बनायीं. उसकी पीठ को सीट से टिकाया. उसका सर खिड़की के शीशे के सहारे रखा. उसकी आँखों में उनींदे स्वप्न रखे. उसके बदन में एक अनगढ़ नृत्य की लय रखी. 
चित्रकार ने रेल में यात्रा कर रही एक नन्ही प्यारी लड़की बनाते हुए पास की बर्थ पर सोये आदमी के मन पर स्याह रेख बनायी. न जी सकने लायक बेचैनी से भरी हुई स्याह रेख. 
हुश-हुश, हश-हश, सूं ऊऊ की आवाज़ों में धक्के खाती हुई ठण्ड से भरी ज़िन्दगी और एक तुम. 
तुम, तुम तुम.
[Painting Courtesy : Judi Light]
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Published on October 30, 2015 19:11
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Kishore Chaudhary
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