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1. Merii nigaahon kii pyaas, terii nigaahon mein dekhii hai maine
Nazarein na churaanaa, der se siikha hai maine…
‘मेरी निगाहों की प्यास, तेरी निगाहों में देखी है मैंने
नज़रें ना चुराना, देर से सीखा है मैंने
”
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कितना प्यारा दिन है और कितनी प्यारी है ये काली राते।
इन दिन और रातो से कई ज़्यादा अच्छी लगती है तुम्हारी बाते।
दुनियाँ है बड़ी जालिम कोई सच कोई झूठ क्या क्या तुम्हें बता दे।
मेरी निगाहों से तुम देखो, ताजमहल से भी ज़्यादा सुंदर है तुम्हारी आँखें।
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