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Madina Quotes
Quotes tagged as "madina"
Showing 1-2 of 2
“क़ाला रसूलुल्लाह ﷺ :
“इन्नी उरीतु फ़ी मनामी, का-अन्ना बनी हकम इब्नि अबी अल-आस,
यनज़ूना अला मिनबरी, कमा तनज़ू अल-क़िरदह।”
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
शाम से चली थी एक ज़ुल्म की आँधी
मदीने की फ़िज़ाओं पर ख़ौफ़ के बादल ठहर आए
हालात थे इस क़दर, गर्द में लिपटे हुए
गुज़रते लम्हे, आने वाले वक़्त को न पढ़ पाए
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
न जाने क्यों तारीख़ ने कम लिखा वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
कुछ ऐसे भी सच है, हम जिससे वाक़िफ़ हो पाए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बहा ख़ून कर्बला मे, आलम ए इस्लाम को, सुर्ख़ कर गया
जो ज़िंदा था ज़मीर से, वो बैअत-ए-जबर से फिर गया
ज़ालिमों को, इश्क़-ए-अहल-ए-बैत गवारा न हुआ,
सो कुचलने को, आल-ए-रसूल की मोहब्बत,
एक लश्कर, मदीने की जानिब रवाना हुआ,
फिर से एक बार, कर्बला का मंज़र दोहराया गया,
नबी के शहर को ख़ून से नहलाया गया,
मासूम बेटियों के रुख़सार से हिजाब छीना गया.
पाक ख़ातूनों की हुरमत को भी लूटा गया
मिम्बरे रसूल पर बांधे गए ग़लीच घोड़े
मस्जिद ऐ नबवी की, अज़मत को टापों तले रौंदा गया ,
सहमे हुए थे, दर-ओ-दीवार शहर-ए-तय्यबा के,
मातम में डूबे हुए थे, घर अंसार के,
अज़ाँ भी रो के पढ़ी जाती थी, उन दिनों शायद,
नमाज़ों में भी छलक उठते थे, अश्क दर्द के ,
सदियों यह शहर इस ज़ख्म से उभरा नहीं,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं,
बाद उसके आप मुस्कुराए नहीं ,
दो गवाह काफी होते हैं, जुर्म साबित करने को.
फिर भी लोग बेचैन हैं, उसे रज़ी अल्लाह कहने को,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
तारीख मे ज़िंदा, दूसरा गवाह है वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे,
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
यह दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं”
― "Zaki's Gift Of Love"
“इन्नी उरीतु फ़ी मनामी, का-अन्ना बनी हकम इब्नि अबी अल-आस,
यनज़ूना अला मिनबरी, कमा तनज़ू अल-क़िरदह।”
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
शाम से चली थी एक ज़ुल्म की आँधी
मदीने की फ़िज़ाओं पर ख़ौफ़ के बादल ठहर आए
हालात थे इस क़दर, गर्द में लिपटे हुए
गुज़रते लम्हे, आने वाले वक़्त को न पढ़ पाए
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
न जाने क्यों तारीख़ ने कम लिखा वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
कुछ ऐसे भी सच है, हम जिससे वाक़िफ़ हो पाए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बहा ख़ून कर्बला मे, आलम ए इस्लाम को, सुर्ख़ कर गया
जो ज़िंदा था ज़मीर से, वो बैअत-ए-जबर से फिर गया
ज़ालिमों को, इश्क़-ए-अहल-ए-बैत गवारा न हुआ,
सो कुचलने को, आल-ए-रसूल की मोहब्बत,
एक लश्कर, मदीने की जानिब रवाना हुआ,
फिर से एक बार, कर्बला का मंज़र दोहराया गया,
नबी के शहर को ख़ून से नहलाया गया,
मासूम बेटियों के रुख़सार से हिजाब छीना गया.
पाक ख़ातूनों की हुरमत को भी लूटा गया
मिम्बरे रसूल पर बांधे गए ग़लीच घोड़े
मस्जिद ऐ नबवी की, अज़मत को टापों तले रौंदा गया ,
सहमे हुए थे, दर-ओ-दीवार शहर-ए-तय्यबा के,
मातम में डूबे हुए थे, घर अंसार के,
अज़ाँ भी रो के पढ़ी जाती थी, उन दिनों शायद,
नमाज़ों में भी छलक उठते थे, अश्क दर्द के ,
सदियों यह शहर इस ज़ख्म से उभरा नहीं,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं,
बाद उसके आप मुस्कुराए नहीं ,
दो गवाह काफी होते हैं, जुर्म साबित करने को.
फिर भी लोग बेचैन हैं, उसे रज़ी अल्लाह कहने को,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
तारीख मे ज़िंदा, दूसरा गवाह है वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे,
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
यह दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं”
― "Zaki's Gift Of Love"
“If Meccan Islam tends Muslims to be the best of beings, its Madina version could turn them into the worst of monsters, making the state of Ummah dependent upon the stress of the Mullahs on either. So, Iran is not what it was, Indonesia may not remain as it is, and so on.”
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