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Zakiashkim Quotes
Quotes tagged as "zakiashkim"
Showing 1-30 of 199
“The growing hatred against Islam is itself a sign that one day Islam will knock on every person’s heart, and every individual will embrace Islam. Because the end of every hatred is nothing but love. Especially when hatred reaches its peak, it ultimately falls into the lap of love.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“Eid ul-Adha is not only about sacrificing an animal. Before sacrificing the animal, we must first put the knife to our pride, selfishness, and ego, and slaughter the negative desires and animal living inside our hearts, minds, thoughts, and personalities.
Only then can we achieve the true meaning of Eid ul-Adha. May Allah accept all our good deeds and sacrifices.”
― "Zaki's Gift Of Love"
Only then can we achieve the true meaning of Eid ul-Adha. May Allah accept all our good deeds and sacrifices.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“क़ाला रसूलुल्लाह ﷺ :
“इन्नी उरीतु फ़ी मनामी, का-अन्ना बनी हकम इब्नि अबी अल-आस,
यनज़ूना अला मिनबरी, कमा तनज़ू अल-क़िरदह।”
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
शाम से चली थी एक ज़ुल्म की आँधी
मदीने की फ़िज़ाओं पर ख़ौफ़ के बादल ठहर आए
हालात थे इस क़दर, गर्द में लिपटे हुए
गुज़रते लम्हे, आने वाले वक़्त को न पढ़ पाए
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
न जाने क्यों तारीख़ ने कम लिखा वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
कुछ ऐसे भी सच है, हम जिससे वाक़िफ़ हो पाए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बहा ख़ून कर्बला मे, आलम ए इस्लाम को, सुर्ख़ कर गया
जो ज़िंदा था ज़मीर से, वो बैअत-ए-जबर से फिर गया
ज़ालिमों को, इश्क़-ए-अहल-ए-बैत गवारा न हुआ,
सो कुचलने को, आल-ए-रसूल की मोहब्बत,
एक लश्कर, मदीने की जानिब रवाना हुआ,
फिर से एक बार, कर्बला का मंज़र दोहराया गया,
नबी के शहर को ख़ून से नहलाया गया,
मासूम बेटियों के रुख़सार से हिजाब छीना गया.
पाक ख़ातूनों की हुरमत को भी लूटा गया
मिम्बरे रसूल पर बांधे गए ग़लीच घोड़े
मस्जिद ऐ नबवी की, अज़मत को टापों तले रौंदा गया ,
सहमे हुए थे, दर-ओ-दीवार शहर-ए-तय्यबा के,
मातम में डूबे हुए थे, घर अंसार के,
अज़ाँ भी रो के पढ़ी जाती थी, उन दिनों शायद,
नमाज़ों में भी छलक उठते थे, अश्क दर्द के ,
सदियों यह शहर इस ज़ख्म से उभरा नहीं,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं,
बाद उसके आप मुस्कुराए नहीं ,
दो गवाह काफी होते हैं, जुर्म साबित करने को.
फिर भी लोग बेचैन हैं, उसे रज़ी अल्लाह कहने को,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
तारीख मे ज़िंदा, दूसरा गवाह है वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे,
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
यह दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं”
― "Zaki's Gift Of Love"
“इन्नी उरीतु फ़ी मनामी, का-अन्ना बनी हकम इब्नि अबी अल-आस,
यनज़ूना अला मिनबरी, कमा तनज़ू अल-क़िरदह।”
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
शाम से चली थी एक ज़ुल्म की आँधी
मदीने की फ़िज़ाओं पर ख़ौफ़ के बादल ठहर आए
हालात थे इस क़दर, गर्द में लिपटे हुए
गुज़रते लम्हे, आने वाले वक़्त को न पढ़ पाए
ये दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
फ़ी सनति थलासीन व सित्तीन लिल-हिज्रह”
न जाने क्यों तारीख़ ने कम लिखा वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
कुछ ऐसे भी सच है, हम जिससे वाक़िफ़ हो पाए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
बहा ख़ून कर्बला मे, आलम ए इस्लाम को, सुर्ख़ कर गया
जो ज़िंदा था ज़मीर से, वो बैअत-ए-जबर से फिर गया
ज़ालिमों को, इश्क़-ए-अहल-ए-बैत गवारा न हुआ,
सो कुचलने को, आल-ए-रसूल की मोहब्बत,
एक लश्कर, मदीने की जानिब रवाना हुआ,
फिर से एक बार, कर्बला का मंज़र दोहराया गया,
नबी के शहर को ख़ून से नहलाया गया,
मासूम बेटियों के रुख़सार से हिजाब छीना गया.
पाक ख़ातूनों की हुरमत को भी लूटा गया
मिम्बरे रसूल पर बांधे गए ग़लीच घोड़े
मस्जिद ऐ नबवी की, अज़मत को टापों तले रौंदा गया ,
सहमे हुए थे, दर-ओ-दीवार शहर-ए-तय्यबा के,
मातम में डूबे हुए थे, घर अंसार के,
अज़ाँ भी रो के पढ़ी जाती थी, उन दिनों शायद,
नमाज़ों में भी छलक उठते थे, अश्क दर्द के ,
सदियों यह शहर इस ज़ख्म से उभरा नहीं,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं,
बाद उसके आप मुस्कुराए नहीं ,
दो गवाह काफी होते हैं, जुर्म साबित करने को.
फिर भी लोग बेचैन हैं, उसे रज़ी अल्लाह कहने को,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
कर्बला के बाद, यज़ीद के ख़िलाफ़,
तारीख मे ज़िंदा, दूसरा गवाह है वाक़िया-ए-हर्रा
ज़ुल्म से थर्रा रहा था मदीने का ज़र्रा ज़र्रा
मरवान के बंदर मिम्बर पर उछलते नज़र आए थे,
जो देखा रसूल अल्लाह ने, किसी और ने देखा नहीं
यह दर्द था दिल में रसूले ख़ुदा के,
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं
देखा एक ख़्वाब, बाद उसके आप, मुस्कुराए नहीं”
― "Zaki's Gift Of Love"
“Islamophobes, attention please:
For your information, around 30–40 million animals are slaughtered globally during Eid ul-Adha. Yet throughout the rest of the year, an estimated 1–3 trillion animals are slaughtered annually for:
• food production
• leather and clothing
• medicine and research
• cosmetics testing
• pet food
• industrial products
So don’t pretend your outrage is about animal welfare. Your selective criticism only exposes hatred and hypocrisy Nothing more.”
― "Zaki's Gift Of Love"
For your information, around 30–40 million animals are slaughtered globally during Eid ul-Adha. Yet throughout the rest of the year, an estimated 1–3 trillion animals are slaughtered annually for:
• food production
• leather and clothing
• medicine and research
• cosmetics testing
• pet food
• industrial products
So don’t pretend your outrage is about animal welfare. Your selective criticism only exposes hatred and hypocrisy Nothing more.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“कुत्ते अपने पट्टे तोड़ कर आ जाते है।
बिला वजह सड़को पर भोकने आ जाते है।
साल भर इनकी आँखों पर पट्टी रहती है
ईद आ जाये, तो बर्दाश्त नहीं होता
वहशी ख़ुद, जानवर के हिमायती बन कर आ जाते है”
―
बिला वजह सड़को पर भोकने आ जाते है।
साल भर इनकी आँखों पर पट्टी रहती है
ईद आ जाये, तो बर्दाश्त नहीं होता
वहशी ख़ुद, जानवर के हिमायती बन कर आ जाते है”
―
“Imtiaz Ali slams women:-
“I don't like when someone says ‘I am comfortable in my Burqa. I am comfortable in my parda’. It's a degenerated society; if you feel like this, it's not okay. It means that you have become so victimised in your mind, I don't know how.”
Mohammed Zaki Ansari's Reply :-
If religion and culture do not advise how a woman should dress,
then Imtiaz Ali and his mindset will dictate how much of a woman's body should be exposed in public so that she may be seen as a progressive and liberated woman who has broken free from a degenerated society.
He will dictate your choices and preferences for you, effectively deciding what you should want, all while claiming to liberate your mind from a victim mentality.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“I don't like when someone says ‘I am comfortable in my Burqa. I am comfortable in my parda’. It's a degenerated society; if you feel like this, it's not okay. It means that you have become so victimised in your mind, I don't know how.”
Mohammed Zaki Ansari's Reply :-
If religion and culture do not advise how a woman should dress,
then Imtiaz Ali and his mindset will dictate how much of a woman's body should be exposed in public so that she may be seen as a progressive and liberated woman who has broken free from a degenerated society.
He will dictate your choices and preferences for you, effectively deciding what you should want, all while claiming to liberate your mind from a victim mentality.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“हर शहर, हर गाँव, हर क़स्बे, हर सड़क पर नुमाइश होगी,
दीन और ईमान का जनाज़ा है, थोड़ा अदब से देखना।
रो-रो कर सुनाएँगे वो प्यास की दास्ताँ,
तुम शरबतों के गिलासों के संग तमाशा देखना।
मातम है, रंज है, फिर भी मेले सजे हैं जैसे जश्न हो,
जुलूसों की रौनक में शहादत का तमाशा देखना।
चाहत की हद है, लगाव की इन्तहा है,
निस्बत-ए-हुसैन को काग़ज़ और लकड़ी में देखना।
ताजियों की भीड़ में, शरीयत से खिलवाड़,
भूल,कर पैगाम ए हुसैन, बाज़ीगरों की बाज़ीगरी
तुम दुनिया की रंग-बिरंगी आँखों से देखना।
दीन और ईमान का जनाज़ा है,
थोड़ा अदब से देखना.”
― "Zaki's Gift Of Love"
दीन और ईमान का जनाज़ा है, थोड़ा अदब से देखना।
रो-रो कर सुनाएँगे वो प्यास की दास्ताँ,
तुम शरबतों के गिलासों के संग तमाशा देखना।
मातम है, रंज है, फिर भी मेले सजे हैं जैसे जश्न हो,
जुलूसों की रौनक में शहादत का तमाशा देखना।
चाहत की हद है, लगाव की इन्तहा है,
निस्बत-ए-हुसैन को काग़ज़ और लकड़ी में देखना।
ताजियों की भीड़ में, शरीयत से खिलवाड़,
भूल,कर पैगाम ए हुसैन, बाज़ीगरों की बाज़ीगरी
तुम दुनिया की रंग-बिरंगी आँखों से देखना।
दीन और ईमान का जनाज़ा है,
थोड़ा अदब से देखना.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“कुत्ते भी अपने बच्चों को अज़मत-ए-अहलेबैत बता देते हैं,
इस दर की अदब-शनासी का क़रीना सिखला देते हैं।
जो अपनी औलाद की तरबियत भी न कर सका शरीअत पर,
दरबारी मौलवी उसको भी रज़ियल्लाह बता देते हैं।”
― "Zaki's Gift Of Love"
इस दर की अदब-शनासी का क़रीना सिखला देते हैं।
जो अपनी औलाद की तरबियत भी न कर सका शरीअत पर,
दरबारी मौलवी उसको भी रज़ियल्लाह बता देते हैं।”
― "Zaki's Gift Of Love"
“Imtiaz Ali slams women:-
“I don't like when someone says ‘I am comfortable in my Burqa. I am comfortable in my parda’. It's a degenerated society; if you feel like this, it's not okay. It means that you have become so victimised in your mind, I don't know how.”
Mohammed Zaki Ansari's Reply :-
At the End of the day, Women is still not truly free, she stands in the middle. On one side, religion and culture urge her toward modesty. On the other side, Imtiaz Ali, fashion designers, and influencers pressure her to reveal skin more and more in the name of liberation.
Both sides claim to be empowering her, yet both seek to influence her choices. True freedom begins when a woman is trusted to decide for herself.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“I don't like when someone says ‘I am comfortable in my Burqa. I am comfortable in my parda’. It's a degenerated society; if you feel like this, it's not okay. It means that you have become so victimised in your mind, I don't know how.”
Mohammed Zaki Ansari's Reply :-
At the End of the day, Women is still not truly free, she stands in the middle. On one side, religion and culture urge her toward modesty. On the other side, Imtiaz Ali, fashion designers, and influencers pressure her to reveal skin more and more in the name of liberation.
Both sides claim to be empowering her, yet both seek to influence her choices. True freedom begins when a woman is trusted to decide for herself.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“अगर तुम्हारे लिए यज़ीद लानती नहीं है ,
तो फिर वो नस्ल हैं जिसमें तुम पैदा हुए हो
If Yazid is not cursed in your sight, then the accursed lineage is the one into which you were born.”
― "Zaki's Gift Of Love"
तो फिर वो नस्ल हैं जिसमें तुम पैदा हुए हो
If Yazid is not cursed in your sight, then the accursed lineage is the one into which you were born.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“वो कहते है, तबाह हो गई नस्ल ए यज़ीद।
तो फिर यह नजाएज़ औलादें किस की है ?
जो दिफ़ा ए यज़ीद करने आ जाती है”
― "Zaki's Gift Of Love"
तो फिर यह नजाएज़ औलादें किस की है ?
जो दिफ़ा ए यज़ीद करने आ जाती है”
― "Zaki's Gift Of Love"
“Ego is not an attitude, it's a disease of the mind. Every disease demands a choice: heal it, or perish with it.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“रिश्तों की लाशों का भी तो कुछ इंतेज़ाम होना चाहिए
अब कोठियों के किसी कोने मे एक क़ब्रिस्तान भी होना चाहिए
ज़रा संभाल कर रख ज़माने यह अल्फ़ाज़ बहुत प्यारा है
अब हर फ़रेब का नाम पैरेंटल हाउस होना चाहिए”
― "Zaki's Gift Of Love"
अब कोठियों के किसी कोने मे एक क़ब्रिस्तान भी होना चाहिए
ज़रा संभाल कर रख ज़माने यह अल्फ़ाज़ बहुत प्यारा है
अब हर फ़रेब का नाम पैरेंटल हाउस होना चाहिए”
― "Zaki's Gift Of Love"
“If wealth doesn't make one humble, don't mistake it for a blessing from God. Not everything that enriches your pocket is Rahmat.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“अल्लाह की रहमत हैं बच्चे, जितने हों उतने अच्छे,
मगर एक ही पैदा करना, अगर अद्ल में हो तुम कच्चे।”
― "Zaki's Gift Of Love"
मगर एक ही पैदा करना, अगर अद्ल में हो तुम कच्चे।”
― "Zaki's Gift Of Love"
“The era of opportunity on YouTube is over. Now, the era of slavery has begun”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“ग़दीर-ए-ख़ुम
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
ग़दीर-ए-ख़ुम में जो गूंजा था क़ौल-ए-मुस्तफ़ा
वो ऐलान-ए-मोहब्बत ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
हिजरत की रात जान हथेली पर रख कर
सो गए रसूल अल्लाह के बिस्तर पर
वफ़ा का ये अंदाज़ ही काफी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
Become a Medium member
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
जो हुआ ख़ैबर के मौके पर मौजिज़ा
रोज़ कहा हुआ करते हैं
रसूल अल्लाह ने फ़रमाया
“कल अलम दूंगा हाथ में उसके
अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं”
सुबह हुई तो नाम-ए-अली रोशन हुआ
अलम अली के हाथों में ज़ाहिर हुआ
कौन है अली ये बताने को
ख़ैबर का वो मंज़र ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
“मन कुंतो मौला”
“फ़हाज़ा अली उन मौला”
― "Zaki's Gift Of Love"
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
ग़दीर-ए-ख़ुम में जो गूंजा था क़ौल-ए-मुस्तफ़ा
वो ऐलान-ए-मोहब्बत ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
हिजरत की रात जान हथेली पर रख कर
सो गए रसूल अल्लाह के बिस्तर पर
वफ़ा का ये अंदाज़ ही काफी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
Become a Medium member
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
जो हुआ ख़ैबर के मौके पर मौजिज़ा
रोज़ कहा हुआ करते हैं
रसूल अल्लाह ने फ़रमाया
“कल अलम दूंगा हाथ में उसके
अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं”
सुबह हुई तो नाम-ए-अली रोशन हुआ
अलम अली के हाथों में ज़ाहिर हुआ
कौन है अली ये बताने को
ख़ैबर का वो मंज़र ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
“मन कुंतो मौला”
“फ़हाज़ा अली उन मौला”
― "Zaki's Gift Of Love"
“मस्जिदें ख़ाली देख कर लगता था वो मर गया
शुक्र है जुलूस मिलाद-उन-नबी देख कर पता लगा,
मुसलमां जिंदा तो है, बस दीन से भटक गया”
― "Zaki's Gift Of Love"
शुक्र है जुलूस मिलाद-उन-नबी देख कर पता लगा,
मुसलमां जिंदा तो है, बस दीन से भटक गया”
― "Zaki's Gift Of Love"
“ईद मिलाद-उन-नबी का एक फ़ायदा ये भी है कि जो 2 ईदी वाला मुसलमान था
अब वो 3 ईद वाला हो गया। इसे कहते हैं अल्लाह के रहमत”
― "Zaki's Gift Of Love"
अब वो 3 ईद वाला हो गया। इसे कहते हैं अल्लाह के रहमत”
― "Zaki's Gift Of Love"
“उम्मते मुस्लिमा थी जो कभी,
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
तीन सो तेरह थे बदर मे , जैसे एक जिस्म एक जान थे
सहाबी हुए किसी के, अहले बेत किसी के,
सुन्नते रसूल का भी, अब बटवारा हो गया
क़िब्ला तो वही एक है सबका,
और एक दुसरे के लिए, मुसलमां इस्लाम से ख़ारिज हो गया ,
हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया,
उम्मते मुस्लिमा थी जो कभी,
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया”
― "Zaki's Gift Of Love"
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
तीन सो तेरह थे बदर मे , जैसे एक जिस्म एक जान थे
सहाबी हुए किसी के, अहले बेत किसी के,
सुन्नते रसूल का भी, अब बटवारा हो गया
क़िब्ला तो वही एक है सबका,
और एक दुसरे के लिए, मुसलमां इस्लाम से ख़ारिज हो गया ,
हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया,
उम्मते मुस्लिमा थी जो कभी,
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया”
― "Zaki's Gift Of Love"
“में भी एक दरगाह खोल लूं."
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
बड़ी ज़रूरत है वसीलों की ज़माने को
गर मिल जाए कोई बुजुर्ग तो एक दरगाह खोल लूं
तबर्रुक, सिन्नी, ग़िलाफ़ फूल कई काम चल जायेगें
जितने हैं बेरोज़गार ख़ानदान मे, सब रोज़ी से लग जायेगें
टीले वाले मज़ार पर, चढा के चादर मांगी यही इक दुआ
मिल जाए जगह कुशादा आप जेसी,
तो मे भी एक दरगाह खोल लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
करामातों की सच्ची एक, क़िताब छपवा दूंगा
बच्चा देते 40 दिन मे, पर्चे बटवा दूंगा
500 वाली चादर तुमको रोज़ी भी दिलवाएगी
गर चढ़ा दो 2000 की, जन्नत भी मिल जाएगी
वक़्त हो चाहे जितना तेढा, बाबा पार लगाते बेढा
अच्छे अच्छे कुछ एसे कलीमात सोच लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
भूत प्रेत आसाब असर , सब का इलाज इधर है
जिन्नातों का भी, पक्का जुगाड इधर है,
पढेंगे नाते राग अलाप के, मस्त माहोल बन जायेगा,
हाज़री वाले क़व्वालों का, स्टेज इधर सज जायेगा,
अब बडा के दाढी मे भी ख़ादिम वाला, चोला ओढ लूं
बड़ी ज़रूरत है, वसीलों की ज़माने को,
अब में भी एक दरगाह खोल लूं.
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं”
― "Zaki's Gift Of Love"
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
बड़ी ज़रूरत है वसीलों की ज़माने को
गर मिल जाए कोई बुजुर्ग तो एक दरगाह खोल लूं
तबर्रुक, सिन्नी, ग़िलाफ़ फूल कई काम चल जायेगें
जितने हैं बेरोज़गार ख़ानदान मे, सब रोज़ी से लग जायेगें
टीले वाले मज़ार पर, चढा के चादर मांगी यही इक दुआ
मिल जाए जगह कुशादा आप जेसी,
तो मे भी एक दरगाह खोल लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
करामातों की सच्ची एक, क़िताब छपवा दूंगा
बच्चा देते 40 दिन मे, पर्चे बटवा दूंगा
500 वाली चादर तुमको रोज़ी भी दिलवाएगी
गर चढ़ा दो 2000 की, जन्नत भी मिल जाएगी
वक़्त हो चाहे जितना तेढा, बाबा पार लगाते बेढा
अच्छे अच्छे कुछ एसे कलीमात सोच लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
भूत प्रेत आसाब असर , सब का इलाज इधर है
जिन्नातों का भी, पक्का जुगाड इधर है,
पढेंगे नाते राग अलाप के, मस्त माहोल बन जायेगा,
हाज़री वाले क़व्वालों का, स्टेज इधर सज जायेगा,
अब बडा के दाढी मे भी ख़ादिम वाला, चोला ओढ लूं
बड़ी ज़रूरत है, वसीलों की ज़माने को,
अब में भी एक दरगाह खोल लूं.
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं”
― "Zaki's Gift Of Love"
“मौत के बाद भी ख़ुदा जिसे ज़िंदा रखना चाहता है,
लिख देता है क़िस्मत में मौत शहादत की,
या नवाज़ता है क़लम से, बंदे को मुसन्निफ़ बना देता है।”
― "Zaki's Gift Of Love"
लिख देता है क़िस्मत में मौत शहादत की,
या नवाज़ता है क़लम से, बंदे को मुसन्निफ़ बना देता है।”
― "Zaki's Gift Of Love"
“रसूल अल्लाह (ﷺ) का दिल!!!
उम्मते मुस्लिमा ने रसूल अल्लाह का दिल
कुछ यूँ दुखा रखा है
क़तील ए हुसैन को मामू ज़ात भाई बना रखा है
रुसवा है आज ज़माने में,
यह क़ौम इसलिए भी शायद,
पढ़ते हैं दूरूद नमाज़ में और,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
जो दे तक़लीफ़ सय्यदना को वो मुसलमां कैसे होगा
बुग्ज़ हो दिल में अहले बेत का, वो सहाबी कैसे होगा
मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला.
हो जो मुनकिर इस हदीस का, फिर वो मोमिन कैसे होगा.
जिसने उठाई तलवार, ख़िलाफ़, आले रसूल के.
सोचता हूँ वो शख़्स ईमान पर कैसे होगा,
न जाने क्यों ऐसे लोगो को बुज़ुर्ग बना रखा है ,
न जाने किस डर से हक़ को छुपा रखा है,
जब अली जैसे थे साथी, तो ख़िलाफ़त के परचम लहराए,
और अली के हिस्से में, गद्दार कुछ ज़्यादा आए,
न की क़ुबूल बैत अली की, बुग़्ज़ अपनी ज़िद पर था,
वो ज़ालिम, क़ुरान को नेज़ो पर उठा लाए।
जो ज़ख्म पहुँचा था, हसनेन के दिल को कभी,
क्या हमने उस दर्द को भी भुला रखा है.
एक बादशाह को, अमीरुल मोमिनीन बना रखा है.
शहादते उस्मान की आंधी से, बग़ावत के शोले भड़काए गए.
मक्कारियों को, हक़्क़ा नियत के, झूठे लिबास पहनाए गए.
क़िसासे उस्मान के पीछे, चाहत ख़िलाफ़त की छुपी थी,
अहले बैत के वक़ार भी, लालच के आगे भुलाए गए.
इस ग़ुस्ताख़ी को, बस एक छोटी सी ख़ता बता रखा है.
उम्मते मुस्लिमा ने. रसूल अल्लाह का दिल.
कुछ यूँ दुखा रखा है,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है”
― "Zaki's Gift Of Love"
उम्मते मुस्लिमा ने रसूल अल्लाह का दिल
कुछ यूँ दुखा रखा है
क़तील ए हुसैन को मामू ज़ात भाई बना रखा है
रुसवा है आज ज़माने में,
यह क़ौम इसलिए भी शायद,
पढ़ते हैं दूरूद नमाज़ में और,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
जो दे तक़लीफ़ सय्यदना को वो मुसलमां कैसे होगा
बुग्ज़ हो दिल में अहले बेत का, वो सहाबी कैसे होगा
मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला.
हो जो मुनकिर इस हदीस का, फिर वो मोमिन कैसे होगा.
जिसने उठाई तलवार, ख़िलाफ़, आले रसूल के.
सोचता हूँ वो शख़्स ईमान पर कैसे होगा,
न जाने क्यों ऐसे लोगो को बुज़ुर्ग बना रखा है ,
न जाने किस डर से हक़ को छुपा रखा है,
जब अली जैसे थे साथी, तो ख़िलाफ़त के परचम लहराए,
और अली के हिस्से में, गद्दार कुछ ज़्यादा आए,
न की क़ुबूल बैत अली की, बुग़्ज़ अपनी ज़िद पर था,
वो ज़ालिम, क़ुरान को नेज़ो पर उठा लाए।
जो ज़ख्म पहुँचा था, हसनेन के दिल को कभी,
क्या हमने उस दर्द को भी भुला रखा है.
एक बादशाह को, अमीरुल मोमिनीन बना रखा है.
शहादते उस्मान की आंधी से, बग़ावत के शोले भड़काए गए.
मक्कारियों को, हक़्क़ा नियत के, झूठे लिबास पहनाए गए.
क़िसासे उस्मान के पीछे, चाहत ख़िलाफ़त की छुपी थी,
अहले बैत के वक़ार भी, लालच के आगे भुलाए गए.
इस ग़ुस्ताख़ी को, बस एक छोटी सी ख़ता बता रखा है.
उम्मते मुस्लिमा ने. रसूल अल्लाह का दिल.
कुछ यूँ दुखा रखा है,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है”
― "Zaki's Gift Of Love"
“इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
रसूल-ए-ख़ुदा की, हदीस ने वाज़ेह कर दिया है.
क्या है मक़ाम, इमाम हसन का, यह बता दिया है.
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
ख़ून-ए-जंगी से, उम्मत को बचाया है हसन ने,
इस्लाम को फ़ितनों से, बचाया है हसन ने,
रिवायत-ए-दीन को ज़िंदा रखा है,
मोमिनों के लिए अपना घर भी लुटाया है हसन ने,
जन्नत के नौजवानों के, सरदार हैं हसन,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने वाज़ेह कर दिया है,
क्या है अज़मत इमाम हसन की, बता दिया है
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
अहले बैत का वक़ार, कुछ यूँ बुलंद रखा है.
अपनी सख़ावत को, हर चीज़ के ऊपर रखा है.
छोड़ दी खिलाफ़त, और कोई मलाल भी न था,
ख़ैर के सिवा कोई, और दिल मे ख़याल भी न था ,
ख़ैरात देने का अंदाज़, हसन से सीखो,
बादशाहत दे दी उसे, जो मुस्तहिक भी न था,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने, वाज़ेह कर दिया है,
क्या है मक़ाम इमाम हसन का, यह बता दिया है,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
Writter Mohammed Zaki Ansari”
― "Zaki's Gift Of Love"
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
रसूल-ए-ख़ुदा की, हदीस ने वाज़ेह कर दिया है.
क्या है मक़ाम, इमाम हसन का, यह बता दिया है.
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
ख़ून-ए-जंगी से, उम्मत को बचाया है हसन ने,
इस्लाम को फ़ितनों से, बचाया है हसन ने,
रिवायत-ए-दीन को ज़िंदा रखा है,
मोमिनों के लिए अपना घर भी लुटाया है हसन ने,
जन्नत के नौजवानों के, सरदार हैं हसन,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने वाज़ेह कर दिया है,
क्या है अज़मत इमाम हसन की, बता दिया है
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
अहले बैत का वक़ार, कुछ यूँ बुलंद रखा है.
अपनी सख़ावत को, हर चीज़ के ऊपर रखा है.
छोड़ दी खिलाफ़त, और कोई मलाल भी न था,
ख़ैर के सिवा कोई, और दिल मे ख़याल भी न था ,
ख़ैरात देने का अंदाज़, हसन से सीखो,
बादशाहत दे दी उसे, जो मुस्तहिक भी न था,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने, वाज़ेह कर दिया है,
क्या है मक़ाम इमाम हसन का, यह बता दिया है,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
Writter Mohammed Zaki Ansari”
― "Zaki's Gift Of Love"
“हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार"
Islam is like an elephant walking down the street, and dogs never miss a chance to bark.”
― "Zaki's Gift Of Love"
Islam is like an elephant walking down the street, and dogs never miss a chance to bark.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“इस्लाम के ख़िलाफ़ बढ़ती हुई नफ़रत इस बात का सबूत है कि एक दिन इस्लाम हर शख़्स के दिल पर दस्तक देगा और हर एक शख़्स इस्लाम को गले लगा लेगा। इसलिए कि हर नफ़रत का अंत सिर्फ़ और सिर्फ़ मोहब्बत है। ख़ासकर जब नफ़रत उरूज पर पहुँचती है, तो मोहब्बत की गोद में आकर ही गिरती है।”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“If Every Muslim is responsible for every act of terror then It is just as every Jew is a murderer of Jesus Christ, and every Catholic Christian is a follower of Hitler and Mussolini.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“Russia Resplendent"
From silver birch forests to lakes that mirror the skies,
Russia’s beauty unfolds, wherever look wandering eyes
Its women shine with grace, like dawn’s first soft light,
Its men stand strong, as pines, enduring through the night.
The white beauty, of the Russian winter, peaceful and bright,
Russia wears, a snowy crown of shimmering,
shimmering crystal light.
snowy crown, of shimmering crystal light.
Summer spreads its, golden sunshine, across the fields so wide,
While rivers, woods, and meadows glow with nature's pride.
Autumn paints the forests rich with amber, red, and gold,
with amber, red, and gold,
Where every breeze carries a story centuries old.
a story centuries old.
Beyond its culture and charms divine,
A taste of history, in every dish we find.
Russia holds, a world of flavors, deep inside.
Delicious cuisine, adds another charm to its pride.
Pelmeni.
Pelmeni warm the heart and bring joy to the soul,
While breakfast, Syrniki make mornings whole..
When sorrow visits, and your spirit feels blue,
The flavor of Bi'lini brings, comfort and sunshine through.
A glass of Ku'vass , sings like an old village song,
old village song,
Its taste lingers gently, in memories for long.
Whenever it's served, you never miss the chance,
A colorful Russian salad, makes your appetite dance.
Russia is a hidden gem, a land to cherish and to love,
A gift of endless beauty, like blessings from above
From silver birch forests to lakes that mirror the skies,
Russia’s beauty unfolds, wherever look wandering eyes
Its women shine with grace, like dawn’s first soft light,
Its men stand strong, as pines, enduring through the night.”
― "Zaki's Gift Of Love"
From silver birch forests to lakes that mirror the skies,
Russia’s beauty unfolds, wherever look wandering eyes
Its women shine with grace, like dawn’s first soft light,
Its men stand strong, as pines, enduring through the night.
The white beauty, of the Russian winter, peaceful and bright,
Russia wears, a snowy crown of shimmering,
shimmering crystal light.
snowy crown, of shimmering crystal light.
Summer spreads its, golden sunshine, across the fields so wide,
While rivers, woods, and meadows glow with nature's pride.
Autumn paints the forests rich with amber, red, and gold,
with amber, red, and gold,
Where every breeze carries a story centuries old.
a story centuries old.
Beyond its culture and charms divine,
A taste of history, in every dish we find.
Russia holds, a world of flavors, deep inside.
Delicious cuisine, adds another charm to its pride.
Pelmeni.
Pelmeni warm the heart and bring joy to the soul,
While breakfast, Syrniki make mornings whole..
When sorrow visits, and your spirit feels blue,
The flavor of Bi'lini brings, comfort and sunshine through.
A glass of Ku'vass , sings like an old village song,
old village song,
Its taste lingers gently, in memories for long.
Whenever it's served, you never miss the chance,
A colorful Russian salad, makes your appetite dance.
Russia is a hidden gem, a land to cherish and to love,
A gift of endless beauty, like blessings from above
From silver birch forests to lakes that mirror the skies,
Russia’s beauty unfolds, wherever look wandering eyes
Its women shine with grace, like dawn’s first soft light,
Its men stand strong, as pines, enduring through the night.”
― "Zaki's Gift Of Love"
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