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Zakiansaripoems Quotes
Quotes tagged as "zakiansaripoems"
Showing 1-16 of 16
“Autumn Shimmer"
In the heart of autumn,
in the season of falling leaves,
when golden foliage swirls like forgotten dreams,
sadness falls upon the withering trees,
but you shimmer like a beautiful love breeze.
The world grows silent beneath a fading sun,
Yet you rise in my heart — my dawn, my only sun.
In autumn when everything withers,
Petals fall like broken feathers
Yet you appear, a single blooming rose,
gorgeous and radiant, heaven knows.
The air grows colder, memories freeze in pain,
yet your presence brings spring once again.
My hope never dies — you are the reason,
you are the breath of life in a dying season.
Your gentle touch soothes my soul with ease,
In the heart of autumn,
you shimmer like a beautiful love breeze.
Brimming with the vibrant colors of life.
A flower that never fades,
among the parched, fallen autumn leaves,
you are the only beautiful rose —
delicate, divine, and dewy.
Thirsty autumn drinks nectar from your embrace.
Upon the wilted dry yellow leaves,
you are the dew of God’s grace.
Autumn withers golden leaves,
but you shimmer like a beautiful love breeze.
You shimmer like a beautiful love breeze.”
― "Zaki's Gift Of Love"
In the heart of autumn,
in the season of falling leaves,
when golden foliage swirls like forgotten dreams,
sadness falls upon the withering trees,
but you shimmer like a beautiful love breeze.
The world grows silent beneath a fading sun,
Yet you rise in my heart — my dawn, my only sun.
In autumn when everything withers,
Petals fall like broken feathers
Yet you appear, a single blooming rose,
gorgeous and radiant, heaven knows.
The air grows colder, memories freeze in pain,
yet your presence brings spring once again.
My hope never dies — you are the reason,
you are the breath of life in a dying season.
Your gentle touch soothes my soul with ease,
In the heart of autumn,
you shimmer like a beautiful love breeze.
Brimming with the vibrant colors of life.
A flower that never fades,
among the parched, fallen autumn leaves,
you are the only beautiful rose —
delicate, divine, and dewy.
Thirsty autumn drinks nectar from your embrace.
Upon the wilted dry yellow leaves,
you are the dew of God’s grace.
Autumn withers golden leaves,
but you shimmer like a beautiful love breeze.
You shimmer like a beautiful love breeze.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“Khalo KItabat :-
ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी
केसा होगा तेरा, घर वो जहाँ में नहीं हूँ
यह सोच कर ही खुश हो जाऊं तस्वीर मेरी लगा ली होगी
ख़तो किताबत की जरूरत, क्यों तुम्हें महसूस होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
भरम हुआ क्या, कभी तुम्हे यह
लगा जो जैसे में आया ,
दरवाज़े पर दस्तक की, आहट कभी तो आती होगी
दरवाज़े पर दस्तक की आहट कभी तो आती होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
चलते चलते राहों मे, क्या अक़्सर रुक जाते हो तुम
कभी किसी की सूरत मे मेरी झलक तो आती होगी
भूल गए हो सब कुछ या, यादों मे कही में बाक़ी हूँ
बीते लम्हो की कुछ बातें कभी तो सताती होगी
ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी”
― "Zaki's Gift Of Love"
ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी
केसा होगा तेरा, घर वो जहाँ में नहीं हूँ
यह सोच कर ही खुश हो जाऊं तस्वीर मेरी लगा ली होगी
ख़तो किताबत की जरूरत, क्यों तुम्हें महसूस होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
भरम हुआ क्या, कभी तुम्हे यह
लगा जो जैसे में आया ,
दरवाज़े पर दस्तक की, आहट कभी तो आती होगी
दरवाज़े पर दस्तक की आहट कभी तो आती होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
चलते चलते राहों मे, क्या अक़्सर रुक जाते हो तुम
कभी किसी की सूरत मे मेरी झलक तो आती होगी
भूल गए हो सब कुछ या, यादों मे कही में बाक़ी हूँ
बीते लम्हो की कुछ बातें कभी तो सताती होगी
ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी
तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी”
― "Zaki's Gift Of Love"
“In this modern era, with the evolving nature of politics, the relationship between citizens and the government has become much like that of an immature child and parent. You should understand who the child is in this analogy. If you grasp this idea, you will better understand how you are being treated by the people you have chosen.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“The word 'influencer' is a polite label for those who sell their souls, ,morality, hate, encourage cancel culture, serve corporate slavery, and spread nudity, vulgarity, misinformation, false ideals, and propaganda across the internet and social media.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“With fire, with word, with open hand,
The water, the air, or the sand—
what we lost, what we gain
No one knows how we first began.
In lust for life, so far we've gone,
From cave to crown, from dust to throne.
We know so little, so much unknown—
Everything feels like rent, yet we call it our own.
We mapped the stars, we crossed the seas,
Tamed the wild and split the trees.
But in our minds, a darker spark:
We forged a sun to burn the dark.
A breath, a flash — the silence torn,
The gift of God in atoms worn.
And now we stand, both wise and blind,
The end we crafted — cruel, unkind
We made the life in this form
We built the world — we made it home.
No one knows how we first began,
But we ourselves written the end.
To destroy the world may take one fatal fluke—
And Human — that is you — invented Nuke
And Human — that is you — invented Nuke”
― "Zaki's Gift Of Love"
The water, the air, or the sand—
what we lost, what we gain
No one knows how we first began.
In lust for life, so far we've gone,
From cave to crown, from dust to throne.
We know so little, so much unknown—
Everything feels like rent, yet we call it our own.
We mapped the stars, we crossed the seas,
Tamed the wild and split the trees.
But in our minds, a darker spark:
We forged a sun to burn the dark.
A breath, a flash — the silence torn,
The gift of God in atoms worn.
And now we stand, both wise and blind,
The end we crafted — cruel, unkind
We made the life in this form
We built the world — we made it home.
No one knows how we first began,
But we ourselves written the end.
To destroy the world may take one fatal fluke—
And Human — that is you — invented Nuke
And Human — that is you — invented Nuke”
― "Zaki's Gift Of Love"
“The biggest fool is the person or nation that thinks America is their friend.”
― "Zaki's Gift Of Love"
― "Zaki's Gift Of Love"
“A special Poem
Sofia Aur Faraz’ is a very special Poem that I wrote for my brother’s wedding, dedicated to a beautiful couple Sofia and Faraz
سم الله الرحمن الرحيم
एक नज़र मिली थी कभी, एक नज़र से,
वो नज़र अनजान नहीं, कुछ अपनी सी नज़र आई।
ख़ुदा का इशारा था, थाम लो हाथ एक दूजे का,
आसमां पर बनी यह जोड़ी, दिल से एक आवाज़ आई।
सुन्नते रसूल से इस रिश्ते का आगाज़ हुआ है,
कितनी मुबारक घड़ी है, दूल्हे का सहरा सजा हुआ है।
गवाह बने हैं फ़रिश्ते भी इस दिलकश नज़ारे के,
ख़ुदा के फ़ज़ल से यह निकाह मुक़म्मल हुआ है।
इन्किसारी हमेशा रहे बन के इस रिश्ते का ताज,
उम्र भर साथ निभाने का किया वादा आज।
दुआओं की छाव मे हर ख़्वाब करे परवाज़
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।
दुल्हन की हया इस रिश्ते का गहना आला हो,
दूल्हे की वफ़ाओं ने जिसे अदब से सँभाला हो।
गुलों से गुलज़ार रहें रास्ते ज़िंदगी के,
हर सुबह, हर शाम राहों में चमकता उजाला हो।
नींव रखी है दिलों ने वफ़ा और अहतराम की
रंग लाएगी गहरा तासीर इनके नाम की
सोफिया की हिक्मत, फ़राज़ की बुलंदी,
यह ख़ासियत खूबसूरत घर सजाएगी ।
इंशाल्लाह ख़ानदान ऐ अंसार में इनकी दास्तां ,
अपना एक अलग ही मुक़ाम बनाएगीं ।
नज़र-ए-बद रखे फ़ासले, इस घर की दहलीज़ से,
महके कोना-कोना, बरकतों के फूल से।
ख़ुदा की रहमत बरसती रहे हर लम्हा,
खुशियों से शाद रहे उम्र का हर एक लम्हा।
ख़िराजे अक़ीदत पेश करते है
तहे दिल से रब का शुक्र अदा करते हैं,
इल्तिजा, दुआ, और मन्नतें उसकी बारगाह में यही है
सदा खुश रहे, आबाद रहे दूल्हा-दुल्हन,
बस एक यही दुआ हम बार-बार करते हैं।
रब की रज़ा हुआ इस रिश्ते का आगाज़
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।”
― "Zaki's Gift Of Love"
Sofia Aur Faraz’ is a very special Poem that I wrote for my brother’s wedding, dedicated to a beautiful couple Sofia and Faraz
سم الله الرحمن الرحيم
एक नज़र मिली थी कभी, एक नज़र से,
वो नज़र अनजान नहीं, कुछ अपनी सी नज़र आई।
ख़ुदा का इशारा था, थाम लो हाथ एक दूजे का,
आसमां पर बनी यह जोड़ी, दिल से एक आवाज़ आई।
सुन्नते रसूल से इस रिश्ते का आगाज़ हुआ है,
कितनी मुबारक घड़ी है, दूल्हे का सहरा सजा हुआ है।
गवाह बने हैं फ़रिश्ते भी इस दिलकश नज़ारे के,
ख़ुदा के फ़ज़ल से यह निकाह मुक़म्मल हुआ है।
इन्किसारी हमेशा रहे बन के इस रिश्ते का ताज,
उम्र भर साथ निभाने का किया वादा आज।
दुआओं की छाव मे हर ख़्वाब करे परवाज़
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।
दुल्हन की हया इस रिश्ते का गहना आला हो,
दूल्हे की वफ़ाओं ने जिसे अदब से सँभाला हो।
गुलों से गुलज़ार रहें रास्ते ज़िंदगी के,
हर सुबह, हर शाम राहों में चमकता उजाला हो।
नींव रखी है दिलों ने वफ़ा और अहतराम की
रंग लाएगी गहरा तासीर इनके नाम की
सोफिया की हिक्मत, फ़राज़ की बुलंदी,
यह ख़ासियत खूबसूरत घर सजाएगी ।
इंशाल्लाह ख़ानदान ऐ अंसार में इनकी दास्तां ,
अपना एक अलग ही मुक़ाम बनाएगीं ।
नज़र-ए-बद रखे फ़ासले, इस घर की दहलीज़ से,
महके कोना-कोना, बरकतों के फूल से।
ख़ुदा की रहमत बरसती रहे हर लम्हा,
खुशियों से शाद रहे उम्र का हर एक लम्हा।
ख़िराजे अक़ीदत पेश करते है
तहे दिल से रब का शुक्र अदा करते हैं,
इल्तिजा, दुआ, और मन्नतें उसकी बारगाह में यही है
सदा खुश रहे, आबाद रहे दूल्हा-दुल्हन,
बस एक यही दुआ हम बार-बार करते हैं।
रब की रज़ा हुआ इस रिश्ते का आगाज़
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।
सोफिया और फ़राज़ अब सदा के लिए हमसफ़र हमराज़।”
― "Zaki's Gift Of Love"
“हर शहर, हर गाँव, हर क़स्बे, हर सड़क पर नुमाइश होगी,
दीन और ईमान का जनाज़ा है, थोड़ा अदब से देखना।
रो-रो कर सुनाएँगे वो प्यास की दास्ताँ,
तुम शरबतों के गिलासों के संग तमाशा देखना।
मातम है, रंज है, फिर भी मेले सजे हैं जैसे जश्न हो,
जुलूसों की रौनक में शहादत का तमाशा देखना।
चाहत की हद है, लगाव की इन्तहा है,
निस्बत-ए-हुसैन को काग़ज़ और लकड़ी में देखना।
ताजियों की भीड़ में, शरीयत से खिलवाड़,
भूल,कर पैगाम ए हुसैन, बाज़ीगरों की बाज़ीगरी
तुम दुनिया की रंग-बिरंगी आँखों से देखना।
दीन और ईमान का जनाज़ा है,
थोड़ा अदब से देखना.”
― "Zaki's Gift Of Love"
दीन और ईमान का जनाज़ा है, थोड़ा अदब से देखना।
रो-रो कर सुनाएँगे वो प्यास की दास्ताँ,
तुम शरबतों के गिलासों के संग तमाशा देखना।
मातम है, रंज है, फिर भी मेले सजे हैं जैसे जश्न हो,
जुलूसों की रौनक में शहादत का तमाशा देखना।
चाहत की हद है, लगाव की इन्तहा है,
निस्बत-ए-हुसैन को काग़ज़ और लकड़ी में देखना।
ताजियों की भीड़ में, शरीयत से खिलवाड़,
भूल,कर पैगाम ए हुसैन, बाज़ीगरों की बाज़ीगरी
तुम दुनिया की रंग-बिरंगी आँखों से देखना।
दीन और ईमान का जनाज़ा है,
थोड़ा अदब से देखना.”
― "Zaki's Gift Of Love"
“ग़दीर-ए-ख़ुम
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
ग़दीर-ए-ख़ुम में जो गूंजा था क़ौल-ए-मुस्तफ़ा
वो ऐलान-ए-मोहब्बत ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
हिजरत की रात जान हथेली पर रख कर
सो गए रसूल अल्लाह के बिस्तर पर
वफ़ा का ये अंदाज़ ही काफी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
Become a Medium member
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
जो हुआ ख़ैबर के मौके पर मौजिज़ा
रोज़ कहा हुआ करते हैं
रसूल अल्लाह ने फ़रमाया
“कल अलम दूंगा हाथ में उसके
अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं”
सुबह हुई तो नाम-ए-अली रोशन हुआ
अलम अली के हाथों में ज़ाहिर हुआ
कौन है अली ये बताने को
ख़ैबर का वो मंज़र ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
“मन कुंतो मौला”
“फ़हाज़ा अली उन मौला”
― "Zaki's Gift Of Love"
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
ग़दीर-ए-ख़ुम में जो गूंजा था क़ौल-ए-मुस्तफ़ा
वो ऐलान-ए-मोहब्बत ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
हिजरत की रात जान हथेली पर रख कर
सो गए रसूल अल्लाह के बिस्तर पर
वफ़ा का ये अंदाज़ ही काफी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
Become a Medium member
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
जो हुआ ख़ैबर के मौके पर मौजिज़ा
रोज़ कहा हुआ करते हैं
रसूल अल्लाह ने फ़रमाया
“कल अलम दूंगा हाथ में उसके
अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं”
सुबह हुई तो नाम-ए-अली रोशन हुआ
अलम अली के हाथों में ज़ाहिर हुआ
कौन है अली ये बताने को
ख़ैबर का वो मंज़र ही काफ़ी है
अली की फज़ीलत के लिए, बस एक हदीस काफ़ी है
“मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला”
फ़हाज़ा अली उन मौला”
“मन कुंतो मौला”
“फ़हाज़ा अली उन मौला”
― "Zaki's Gift Of Love"
“उम्मते मुस्लिमा थी जो कभी,
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
तीन सो तेरह थे बदर मे , जैसे एक जिस्म एक जान थे
सहाबी हुए किसी के, अहले बेत किसी के,
सुन्नते रसूल का भी, अब बटवारा हो गया
क़िब्ला तो वही एक है सबका,
और एक दुसरे के लिए, मुसलमां इस्लाम से ख़ारिज हो गया ,
हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया,
उम्मते मुस्लिमा थी जो कभी,
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया”
― "Zaki's Gift Of Love"
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
तीन सो तेरह थे बदर मे , जैसे एक जिस्म एक जान थे
सहाबी हुए किसी के, अहले बेत किसी के,
सुन्नते रसूल का भी, अब बटवारा हो गया
क़िब्ला तो वही एक है सबका,
और एक दुसरे के लिए, मुसलमां इस्लाम से ख़ारिज हो गया ,
हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया,
उम्मते मुस्लिमा थी जो कभी,
अब कोई देवबंदी, कोई ब्रेलवी, कोई अहले हदीस हो गया
रुसवाई और ज़िल्लत मुक़द्दर है बिखरी हुई क़ौम का
और हर फिरके को यह खुशफ़हमी, जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया
जन्नत पर हमारा कब्ज़ा हो गया”
― "Zaki's Gift Of Love"
“में भी एक दरगाह खोल लूं."
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
बड़ी ज़रूरत है वसीलों की ज़माने को
गर मिल जाए कोई बुजुर्ग तो एक दरगाह खोल लूं
तबर्रुक, सिन्नी, ग़िलाफ़ फूल कई काम चल जायेगें
जितने हैं बेरोज़गार ख़ानदान मे, सब रोज़ी से लग जायेगें
टीले वाले मज़ार पर, चढा के चादर मांगी यही इक दुआ
मिल जाए जगह कुशादा आप जेसी,
तो मे भी एक दरगाह खोल लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
करामातों की सच्ची एक, क़िताब छपवा दूंगा
बच्चा देते 40 दिन मे, पर्चे बटवा दूंगा
500 वाली चादर तुमको रोज़ी भी दिलवाएगी
गर चढ़ा दो 2000 की, जन्नत भी मिल जाएगी
वक़्त हो चाहे जितना तेढा, बाबा पार लगाते बेढा
अच्छे अच्छे कुछ एसे कलीमात सोच लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
भूत प्रेत आसाब असर , सब का इलाज इधर है
जिन्नातों का भी, पक्का जुगाड इधर है,
पढेंगे नाते राग अलाप के, मस्त माहोल बन जायेगा,
हाज़री वाले क़व्वालों का, स्टेज इधर सज जायेगा,
अब बडा के दाढी मे भी ख़ादिम वाला, चोला ओढ लूं
बड़ी ज़रूरत है, वसीलों की ज़माने को,
अब में भी एक दरगाह खोल लूं.
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं”
― "Zaki's Gift Of Love"
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
बड़ी ज़रूरत है वसीलों की ज़माने को
गर मिल जाए कोई बुजुर्ग तो एक दरगाह खोल लूं
तबर्रुक, सिन्नी, ग़िलाफ़ फूल कई काम चल जायेगें
जितने हैं बेरोज़गार ख़ानदान मे, सब रोज़ी से लग जायेगें
टीले वाले मज़ार पर, चढा के चादर मांगी यही इक दुआ
मिल जाए जगह कुशादा आप जेसी,
तो मे भी एक दरगाह खोल लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
करामातों की सच्ची एक, क़िताब छपवा दूंगा
बच्चा देते 40 दिन मे, पर्चे बटवा दूंगा
500 वाली चादर तुमको रोज़ी भी दिलवाएगी
गर चढ़ा दो 2000 की, जन्नत भी मिल जाएगी
वक़्त हो चाहे जितना तेढा, बाबा पार लगाते बेढा
अच्छे अच्छे कुछ एसे कलीमात सोच लूं
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं
भूत प्रेत आसाब असर , सब का इलाज इधर है
जिन्नातों का भी, पक्का जुगाड इधर है,
पढेंगे नाते राग अलाप के, मस्त माहोल बन जायेगा,
हाज़री वाले क़व्वालों का, स्टेज इधर सज जायेगा,
अब बडा के दाढी मे भी ख़ादिम वाला, चोला ओढ लूं
बड़ी ज़रूरत है, वसीलों की ज़माने को,
अब में भी एक दरगाह खोल लूं.
मंदे हैं धंधे सारे, सोच रहा हूं कोई नया काम खोल लूं”
― "Zaki's Gift Of Love"
“रसूल अल्लाह (ﷺ) का दिल!!!
उम्मते मुस्लिमा ने रसूल अल्लाह का दिल
कुछ यूँ दुखा रखा है
क़तील ए हुसैन को मामू ज़ात भाई बना रखा है
रुसवा है आज ज़माने में,
यह क़ौम इसलिए भी शायद,
पढ़ते हैं दूरूद नमाज़ में और,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
जो दे तक़लीफ़ सय्यदना को वो मुसलमां कैसे होगा
बुग्ज़ हो दिल में अहले बेत का, वो सहाबी कैसे होगा
मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला.
हो जो मुनकिर इस हदीस का, फिर वो मोमिन कैसे होगा.
जिसने उठाई तलवार, ख़िलाफ़, आले रसूल के.
सोचता हूँ वो शख़्स ईमान पर कैसे होगा,
न जाने क्यों ऐसे लोगो को बुज़ुर्ग बना रखा है ,
न जाने किस डर से हक़ को छुपा रखा है,
जब अली जैसे थे साथी, तो ख़िलाफ़त के परचम लहराए,
और अली के हिस्से में, गद्दार कुछ ज़्यादा आए,
न की क़ुबूल बैत अली की, बुग़्ज़ अपनी ज़िद पर था,
वो ज़ालिम, क़ुरान को नेज़ो पर उठा लाए।
जो ज़ख्म पहुँचा था, हसनेन के दिल को कभी,
क्या हमने उस दर्द को भी भुला रखा है.
एक बादशाह को, अमीरुल मोमिनीन बना रखा है.
शहादते उस्मान की आंधी से, बग़ावत के शोले भड़काए गए.
मक्कारियों को, हक़्क़ा नियत के, झूठे लिबास पहनाए गए.
क़िसासे उस्मान के पीछे, चाहत ख़िलाफ़त की छुपी थी,
अहले बैत के वक़ार भी, लालच के आगे भुलाए गए.
इस ग़ुस्ताख़ी को, बस एक छोटी सी ख़ता बता रखा है.
उम्मते मुस्लिमा ने. रसूल अल्लाह का दिल.
कुछ यूँ दुखा रखा है,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है”
― "Zaki's Gift Of Love"
उम्मते मुस्लिमा ने रसूल अल्लाह का दिल
कुछ यूँ दुखा रखा है
क़तील ए हुसैन को मामू ज़ात भाई बना रखा है
रुसवा है आज ज़माने में,
यह क़ौम इसलिए भी शायद,
पढ़ते हैं दूरूद नमाज़ में और,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
जो दे तक़लीफ़ सय्यदना को वो मुसलमां कैसे होगा
बुग्ज़ हो दिल में अहले बेत का, वो सहाबी कैसे होगा
मन कुंतो मौला, फ़हाज़ा अली उन मौला.
हो जो मुनकिर इस हदीस का, फिर वो मोमिन कैसे होगा.
जिसने उठाई तलवार, ख़िलाफ़, आले रसूल के.
सोचता हूँ वो शख़्स ईमान पर कैसे होगा,
न जाने क्यों ऐसे लोगो को बुज़ुर्ग बना रखा है ,
न जाने किस डर से हक़ को छुपा रखा है,
जब अली जैसे थे साथी, तो ख़िलाफ़त के परचम लहराए,
और अली के हिस्से में, गद्दार कुछ ज़्यादा आए,
न की क़ुबूल बैत अली की, बुग़्ज़ अपनी ज़िद पर था,
वो ज़ालिम, क़ुरान को नेज़ो पर उठा लाए।
जो ज़ख्म पहुँचा था, हसनेन के दिल को कभी,
क्या हमने उस दर्द को भी भुला रखा है.
एक बादशाह को, अमीरुल मोमिनीन बना रखा है.
शहादते उस्मान की आंधी से, बग़ावत के शोले भड़काए गए.
मक्कारियों को, हक़्क़ा नियत के, झूठे लिबास पहनाए गए.
क़िसासे उस्मान के पीछे, चाहत ख़िलाफ़त की छुपी थी,
अहले बैत के वक़ार भी, लालच के आगे भुलाए गए.
इस ग़ुस्ताख़ी को, बस एक छोटी सी ख़ता बता रखा है.
उम्मते मुस्लिमा ने. रसूल अल्लाह का दिल.
कुछ यूँ दुखा रखा है,
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है.
दुश्मने अहले बेत से दिल मिला रखा है”
― "Zaki's Gift Of Love"
“इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
रसूल-ए-ख़ुदा की, हदीस ने वाज़ेह कर दिया है.
क्या है मक़ाम, इमाम हसन का, यह बता दिया है.
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
ख़ून-ए-जंगी से, उम्मत को बचाया है हसन ने,
इस्लाम को फ़ितनों से, बचाया है हसन ने,
रिवायत-ए-दीन को ज़िंदा रखा है,
मोमिनों के लिए अपना घर भी लुटाया है हसन ने,
जन्नत के नौजवानों के, सरदार हैं हसन,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने वाज़ेह कर दिया है,
क्या है अज़मत इमाम हसन की, बता दिया है
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
अहले बैत का वक़ार, कुछ यूँ बुलंद रखा है.
अपनी सख़ावत को, हर चीज़ के ऊपर रखा है.
छोड़ दी खिलाफ़त, और कोई मलाल भी न था,
ख़ैर के सिवा कोई, और दिल मे ख़याल भी न था ,
ख़ैरात देने का अंदाज़, हसन से सीखो,
बादशाहत दे दी उसे, जो मुस्तहिक भी न था,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने, वाज़ेह कर दिया है,
क्या है मक़ाम इमाम हसन का, यह बता दिया है,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
Writter Mohammed Zaki Ansari”
― "Zaki's Gift Of Love"
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
रसूल-ए-ख़ुदा की, हदीस ने वाज़ेह कर दिया है.
क्या है मक़ाम, इमाम हसन का, यह बता दिया है.
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
ख़ून-ए-जंगी से, उम्मत को बचाया है हसन ने,
इस्लाम को फ़ितनों से, बचाया है हसन ने,
रिवायत-ए-दीन को ज़िंदा रखा है,
मोमिनों के लिए अपना घर भी लुटाया है हसन ने,
जन्नत के नौजवानों के, सरदार हैं हसन,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने वाज़ेह कर दिया है,
क्या है अज़मत इमाम हसन की, बता दिया है
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
अहले बैत का वक़ार, कुछ यूँ बुलंद रखा है.
अपनी सख़ावत को, हर चीज़ के ऊपर रखा है.
छोड़ दी खिलाफ़त, और कोई मलाल भी न था,
ख़ैर के सिवा कोई, और दिल मे ख़याल भी न था ,
ख़ैरात देने का अंदाज़, हसन से सीखो,
बादशाहत दे दी उसे, जो मुस्तहिक भी न था,
रसूल-ए-ख़ुदा की हदीस ने, वाज़ेह कर दिया है,
क्या है मक़ाम इमाम हसन का, यह बता दिया है,
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन,
व लअल्लल्लाह अंयुस्लिहा बिही बैना
फ़ि अतैन अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
अज़ी मतैन मिनल मुस्लिमीन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
इन्ना इब्नी हाज़ा सैय्यदुन
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― "Zaki's Gift Of Love"
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