कुश कल्याण, बूढ़ा केदार, ऋषियों की साधना स्थली-तपोवन, बालीपास (17500 फीट), कालिन्दी खाल पास (19890 फीट), दरवा टॉप (14500 फीट), गणेश की जन्मस्थली-डोडी ताल, शंकर एवं काली माँ की मिलन स्थली-रूपकुंड, दुर्योधन के छुपने के गुप्त स्थल-हर की दून,
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“भैरोघाटी, जहाँ तिब्बत से आने वाली जाठ गंगा का भागीरथी से मिलन होता है, पर बड़ा पुल बनने के बाद से अब तो सड़क ऐन गंगोत्तरी तक पहुँच गई है।”
― Darra Darra Himalaya
― Darra Darra Himalaya
“रुको तुम- मत खोलो इन बन्द पटों को, मुझे बहुत डर लगता है – इन पटों के पीछे बंद हैं कितनी दबी अवाज़ें, विह्वल चीत्कार, कितनी सुनी आँखें, कातर पुकार, कित्ने हाथों का कम्पन, रुँधी गुहार, कितनी आशाएँ, बेबस मनुहार– ये सब धीरे-धीरे पटों के पीछे बन्द हो गइ हैं उन सब अनगिनत अतिरेकों के संग, जो जमाई हैं हमने हमारे भविष्य को देने को रंग- इन पटों से दुर रहो, तुम मत खोलो इन्हें, मुझे बहुत दर लगता है- पत खुलते ही वो आँखें, पुकार, गुहार, वह आशाएँ काँपते हाथों में बन्द में अभिलाषाएँ, छिटक कर तिजोरी से फैल जाएँगी पूरे शयनकक्ष में, करेंगी पीछा मेरा खरोंचने को अपना वर्तमान, मेरे भविष्य से– तुम तब तक दूर रहो अलमारी के पेटों से, जब तक कि मैं शिकार न कर लूँ मुँडेरों से झाँकती सारी भावनाओं का, रुको तुम मत खोलो इन पटों को - मुझे बहुत डर लगता है”
― Darra Darra Himalaya
― Darra Darra Himalaya
“मामूली सी छड़ी के सहारे जब मैं अधर में लटका था तब वह कौन था जो मुझे थामे खड़ा था— मैं नहीं जानता— शायद ईश्वर और ईश्वरीय शक्तियाँ ऐसे ही अपने-आपको प्रकट करती होंगी...”
― Darra Darra Himalaya
― Darra Darra Himalaya
“गंगोत्तरी में सोनी हमें होटल में नहीं बैठने दे रहा था। उसकी यह सतत कोशिश रहती कि हम उस क्षेत्र में टहलते रहें। यह अनुकूलन (acclimatization) के लिए बहुत आवश्यक होता है कि व्यक्ति 8000 फीट पर पहुँचने के बाद एक दिन में 1000 फीट से ज्यादा ऊँचाई न नापे तथा नई ऊँचाई पर पहुँचकर आराम करने के बजाय थोड़ा ऊपर-नीचे घूमे। दो दिनों तक यही सिलसिला चला।”
― Darra Darra Himalaya
― Darra Darra Himalaya
“अरे आप जीवन की दौड़ से भागकर यहाँ हिमालय पर आए हैं— कुछ देर ठहरकर देखें तो सही। गुज़रते क्षण और आते क्षण के मध्य में जो एक छुपा हुआ स्पन्दनहीन अन्तराल है, आती और जाती साँस के मध्य जो एक निष्कम्प ठहराव है, उसको महसूस करने की चेष्टा करें। गति से अभिभूत हम लोग उस ठहराव की आदतन उपेक्षा करते हैं, जबकि मुझे लगता है कि जिस आनन्द की खोज में हम सब भाग रहे हैं वह तो उसी ठहराव में छुपा हमारा इन्तज़ार कर रहा होता है।”
― Darra Darra Himalaya
― Darra Darra Himalaya
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