Status Updates From समुद्र [Samudra]
समुद्र [Samudra] by
Status Updates Showing 1-23 of 23
विकास 'अंजान'
is on page 91 of 96
यदि मैं अपने साथ हूँ तो और किसी के होने की जरूरत है क्या? और दूसरे जो मेरे साथ होते हैं दरअसल वे भी खुद अपने साथ होते हैं। हम साथ चलते हैं यानी साथ होते नहीं। हम अपने साथ ही होते हैं। इसीलिए हम किसी के साथ चल सकते हैं।
— Mar 01, 2020 12:40PM
Add a comment
विकास 'अंजान'
is on page 47 of 96
"... क्या मैंने कभी इंटरेस्ट नहीं दिखाया? मैंने कई बार तुम लोगों को मंदिरों की जानकारी दी है न? सिनेमा-नाटक के बारे में तो हम भी बातें करते हैं न?"
"यह बात नहीं है। मैं कैसे समझाऊँ तुम्हें?...इसके परे भी कई बातें होती हैं। मन में लगातार उभरती रहती हैं। और उसी वक्त किसी से कहने की इच्छा होती है। कई बार तो मामूली बातें होती हैं। और लगता है अनकही बातें कोई समझ लें। तब तुम नहीं होते न। तुम फैक्ट्री में या किसी उलनझन में।
— Mar 01, 2020 11:21AM
Add a comment
"यह बात नहीं है। मैं कैसे समझाऊँ तुम्हें?...इसके परे भी कई बातें होती हैं। मन में लगातार उभरती रहती हैं। और उसी वक्त किसी से कहने की इच्छा होती है। कई बार तो मामूली बातें होती हैं। और लगता है अनकही बातें कोई समझ लें। तब तुम नहीं होते न। तुम फैक्ट्री में या किसी उलनझन में।
विकास 'अंजान'
is on page 31 of 96
चाहे जो हो! उसने सोचा! लेकिन इस समय वह मुझे अपने साथ नहीं चाहती। यह क्या बला है? हर एक का अपना- सिर्फ अपना ऐसा कुछ होता है। मेरा अपना भी ऐसा कुछ है जो सिर्फ मेरा है। लेकिन यह क्या होता है? पति-पत्नी के बीच भी अपना-अपना कोई द्वीप हो सकता है? अब उसके मन में क्या उभर रहा होगा? इस वक्त? कोई विचार? जो मेरे बग़ैर करना है।
— Feb 28, 2020 06:21PM
Add a comment
विकास 'अंजान'
is on page 26 of 96
अक्सर बातें दोनों की एक पसंद से ही होती हैं। फिर भी कुछ पर्दा तो रहता ही है। ऊपर से भले ही न दिखे। वक्त आने पर नंदिनी अपनी बात दबाकर मेरी बात रख भी लेगी लेकिन मुझे कहीं-न-कहीं अहसास होता रहता है। उस पीड़ा का किसी को अंदाज नहीं हो सकता। कैसी पीड़ा है यह? इसका भी ठीक से पता नहीं चलता। पति-पत्नी पूर्णतः एक दूसरे के हो जाते हैं फिर भी एक अदृश्य दूरी रहती है।.. इसका कोई तो इलाज होगा। है भी या नहीं। या है और मैं नहीं जानता?
— Feb 27, 2020 09:45PM
Add a comment
विकास 'अंजान'
is on page 11 of 96
वह दिमाग में बल देकर सोचने लगा - नंदिनी कुछ भी न करते हुए इतनी खुश कैसे रहती है? क्या करती रहती है? घरेलू काम? पढ़ना? मन रमाने के लिए क्या है उसके पास? मुझे तो समय का सतत अभाव महसूस होता है। काम-से-काम निकलते रहते हैं और नंदिनी? उसका समय कैसे कटता होगा? शरू- शुरू में मैंने कई बार उससे पूछा भी। दरअसल उसकी समझ में प्रश्न ही नहीं आया था। वह कभी खाली या उदास बैठी हुई या तारे गिनती हुई दिखी ही नहीं।
— Feb 26, 2020 04:18AM
Add a comment



![समुद्र [Samudra]](https://i.gr-assets.com/images/S/compressed.photo.goodreads.com/books/1631468658l/58979434._SY75_.jpg)





