जाॅली रोजर

स्पाईवर्स श्रंखला के अंतर्गत यह आठवां उपन्यास है, जो क्रम में ‘ऑरोफाईल’ और ‘राकस’ के बाद प्रकाशित हो रहा है— एवं निहाल की तीसरी कहानी है। इससे पूर्व ‘द अफगान हाउंड’ एवं ‘ऑपरेशन साल्जर’ में आप निहाल से मिल चुके हैं। जहां अपनी पिछली दो कहानियों में निहाल एक शातिर और गंभीर किस्म की छवि में नज़र आया था, वहीं इस बार ‘जाॅली रोजर’ में वह बिलकुल अलग अंदाज़ में सामने आयेगा।

‘जाॅली रोजर’ की कहानी भारत के दक्षिण-पूर्व में स्थित अंडमान निकोबार द्वीप समूह से सम्बंधित है— जहां पर्दे के पीछे कुछ ऐसा पक रहा है, जिसमें योरप की एक बड़ी अपराधिक संस्था वेरिया भी ख़ुद को दिलचस्पी लेने से रोक नहीं पा रही। ‘द अफगान हाउंड’ के बाद एक बार फिर वांग इस कहानी में नज़र आयेगा जो इस बार वेरिया के दिये मिशन पर अंडमान पहुंचा है।

बंगाल की खाड़ी से ले कर मलक्का स्ट्रेट तक फैला एक नेटवर्क, जिसे इस क्षेत्र के सभी देश बस अपने देश से सम्बंधित एक छोटा और मामूली गिरोह भर समझते थे— एक ऐसे व्यक्ति द्वारा संचालित एक व्यापक और ऑर्गेनाइज्ड नेटवर्क था, जिसके बारे में दसियों कहानियां प्रचलित थीं कि वह शैतान था जो हर ज़रूरत की जगह पर हमेशा मौजूद रहता था और कोई अगर संगठन से ग़द्दारी करने के बारे में सोच भी लेता तो वह सज़ा देने के लिये हमेशा आसपास होता था।

एक ऐसा नेटवर्क, जिसकी कोई एक पहचान नहीं थी लेकिन उस पूरे स्पेसिफिक रीज़न के सात देशों में फैला हुआ था और उसकी व्यवस्था इतनी पेचीदा थी कि न सम्बंधित देश उसकी व्यापकता की जानकारी रखते थे और न किसी भी तरह पूरी तरह ख़त्म किया जा सकता था। जो संचालित होता था कोको आइलैंड से— जो था तो म्यांमार के अधीन, लेकिन जिसके तार कहीं और से जुड़े थे।

एक रहस्यमयी टापू, जो यूँ तो वीरान था, नौसेना के अंडर में था— लेकिन अचानक से वह इतना महत्वपूर्ण हो गया था कि चीन से ले कर योरप की कुछ बड़ी शक्तियां भी उसमें दिलचस्पी लेने लगी थीं, जबकि भारत को इस सिलसिले में कुछ भनक तक नहीं लग पाई थी। वह टापू, जो भूगर्भीय हलचल के चलते कुछ वक़्त के लिये इतना ऊपर उठ गया था कि उसका पानी में डूबा हिस्सा उभर आया था, और कुछ ही दिन में वापस भी बैठ गया था— लेकिन इस बीच उसने कुछ ऐसा इशारा दे दिया था कि अचानक से लोगों की दिलचस्पी उसमें हो गई थी।

क्या पक रहा था इस रीज़न में, वहां रिकार्ड की गई संदिग्ध गतिविधियों के पीछे कौन था और क्यों अचानक से कोको आइलैंड की तरफ़ हलचल बढ़ गई थी— इसे समझने के लिये लांच होने वाले मिशन का नाम था ‘जाॅली रोजर’, जिसके लिये पहली बार निहाल को रोज़ीना के साथ खोजबीन के लिये निकलता है। क्या होना था इस खोज का परिणाम? कौन था सालार नाम का वह शख़्स जिसे इस संगठन के लोग ज़िंदा भूत कहते थे? चीन से ले कर वेरिया तक की दिलचस्पी क्यों थी उस रहस्यमयी टापू में, जो एकदम से उनका गोल बन गया था? पढ़िये… जाॅली रोजर में!

Jolly Roger

Ashfaq Ahmad
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Published on May 02, 2026 20:03 Tags: books-by-ashfaq-ahmad
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Ashfaq  Ahmad
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