Shivesh

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कामायनी
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Animal Farm
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Mohan Rakesh
“कालिदास:मैंने कहा था कि मैं अथ से आरम्भ करना चाहता हूँ। यह सम्भवतः इच्छा का समय के साथ द्वन्द्व था। परन्तु देख रहा हूँ कि समय अधिक शक्तिशाली है क्योंकि..।”
Mohan Rakesh, आषाढ़ का एक दिन

धर्मवीर भारती
“लेकिन आदमी हँसता है, दुख-दर्द सभी में आदमी हँसता हैं। जैसे हँसते-हँसते आदमी की प्रसन्नाता थक जाती है वैसे ही कभी-कभी रोते-रोते आदमी की उदासी थक जाती है और आदमी करवट बदलता है। ताकि हँसी की छाँह में कुछ विश्राम कर फिर वह आँशुओं की कड़ी धूप में चल सके।”
धर्मवीर भारती, गुनाहों का देवता

धर्मवीर भारती
“दुख अपनी पूरी चोट करने के वक्त अक्सर आदमी की आत्मा और मन को क्लोरोफार्म सूँघा देता है। चन्दर कुछ भी सोच नहीं पा रहा था। संज्ञा-हत, नीरव, निश्चेष्ट…”
धर्मवीर भारती, गुनाहों का देवता
tags: pain

धर्मवीर भारती
“मेरे लिए इस उपन्यास का लिखना वैसा ही रहा है जैसे पीड़ा के क्षणों में पूरी आस्था के प्रार्थना करना, और इस समय भी मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं वह प्रार्थना मन-ही-मन दोहरा रहा हूँ, बस…”
धर्मवीर भारती, गुनाहों का देवता

Mohan Rakesh
“अम्बिका:सम्मान प्राप्त होने पर सम्मान के प्रति प्रकट की गयी उदासीनता व्यक्ति के महत्त्व को बढ़ा देती है। तुम्हें प्रसन्न होना चाहिए कि तुम्हारा भागिनेय लोकनीति में निष्णात है।”
Mohan Rakesh, आषाढ़ का एक दिन

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Manish ...
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