Kashinath Singh
Born
in Varanasi, Uttar Pradesh, India
January 01, 1937
Genre
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काशी का अस्सी
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published
2004
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7 editions
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Upsanhar
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published
2014
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3 editions
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रेहन पर रग्घू
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published
2008
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4 editions
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Mahuacharit
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अपना मोर्चा
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published
2007
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3 editions
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प्रतिनिधि कहानियाँ
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published
2008
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2 editions
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मेरी प्रिय कहानियाँ
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Ghar Ka Jogi Jogda
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कहानी उपखान
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published
2003
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2 editions
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खरोंच
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published
2014
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“सिद्धान्त सोने का गहना है ! रोज-रोज पहनने की चीज नहीं ! शादी-ब्याह तीज-त्योहार में पहन लिया बस ! सिद्धान्त की बात साल में एक-आध बार कर ली, कर ली; बाकी अपनी पालिटिक्स करो ।” उम्मीद”
― kashi ka assi
― kashi ka assi
“उनका एक जीवन-दर्शन था–‘जो पठितव्यम् तो मरितव्यम्, न पठितव्यम् तो मरितव्यम्, फिर दाँत कटाकट क्यों करितव्यम् ?”
― Kashi Ka Assi
― Kashi Ka Assi
“ऐ दुनियावालों! वह पलना लकड़ी है जिसपे बचपन में सोए थे! वह गुल्ली डंडा लकड़ी है, जिससे खेले थे! वह पटरी भी लकड़ी है जिसे लेकर स्कूल गए थे! वह छड़ी भी लकड़ी है जिससे मुदर्रिस की मार खाई थी! ब्याह का पीढ़ा भी लकड़ी है जिसपर ब्याह रचाया था! सुहाग की सेज भी लकड़ी है जिसपर दुल्हन के साथ सोये थे! बुढ़ापे का सहारा लाठी भी तो लकड़ी ही है!
ऐ दुनियावालों! अंतकाल जिस टिकटी पर मसान जाते हो, और जिस चिता पर तुम्हें लिटाया जाता है-सब लकड़ी है!
यह संसार कुछ नहीं, सिर्फ लकड़ी का तमाशा है!”
― काशी का अस्सी
ऐ दुनियावालों! अंतकाल जिस टिकटी पर मसान जाते हो, और जिस चिता पर तुम्हें लिटाया जाता है-सब लकड़ी है!
यह संसार कुछ नहीं, सिर्फ लकड़ी का तमाशा है!”
― काशी का अस्सी
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