Prince Pankaj

Add friend
Sign in to Goodreads to learn more about Prince.


A Gentleman in Mo...
Prince Pankaj is currently reading
by Amor Towles (Goodreads Author)
bookshelves: currently-reading
Reading for the 2nd time
Rate this book
Clear rating

 
Loading...
Munshi Premchand
“वैवाहिक जीवन के प्रभात में लालसा अपनी गुलाबी मादकता के साथ उदय होती है और हृदय के सारे आकाश को अपने माधुर्य की सुनहरी किरणों से रंजित कर देती है। फिर मध्याहन का प्रखर ताप आता है, क्षण-क्षण पर बगूले उठते हैं, और पृथ्वी काँपने लगती है। लालसा का सुनहरा आवरण हट जाता है और वास्तविकता अपने नग्न रूप में सामने आ खड़ी है। उसके बाद विश्राममय सन्ध्या आती है, शीतल और शान्त, जब हम थके हुए पथिकों की भाँति दिन-भर की यात्रा का वृत्तान्त कहते और सुनते हैं तटस्थ भाव से, मानो हम किसी ऊँचे शिखर पर जा बैठे हैं जहाँ नीचे का जनरूरव हम तक नहीं पहुँचता। धनिया”
Munshi Premchand, गोदान [Godan]

“I was not going to feel sorry for myself. No, why should I? When my form came back, or when I picked up wickets, or when I got the big scores, or when I got player of the match, or hit six sixes, had I ever asked God, ‘why me?’ Of course not. Often in my career, I have been the man with silver in the fist. Have I ever asked God, ‘why me?’ No, never. So when the illness came I had no right to ask ‘why me?”
Yuvraj Singh, The Test of My Life

Jandy Nelson
“A painting is both exactly the same and entirely different every single time you look at it.”
Jandy Nelson, I'll Give You the Sun

Ramdhari Singh 'Dinkar'
“तुच्छ है राज्य क्या है केशव?
पाता क्या नर कर प्राप्त विभव?
चिंता प्रभूत, अत्यल्प हास,
कुछ चाकचिक्य, कुछ क्षण विलास |

पर वह भी यहीं गँवाना है,
कुछ साथ नहीं ले जाना है |


'मुझसे मनुष्य जो होते हैं,
कंचन का भार न ढोते हैं,
पाते हैं धन बिखराने को,
लाते हैं रतन लुटाने को |

जग से न कभी कुछ लेते हैं,
दान ही हृदय का देते हैं |


'प्रासादों के कनकाभ शिखर,
होते कबूतरों के ही घर,
महलों में गरुड़ ना होता है,
कंचन पर कभी न सोता है |

बसता वह कहीं पहाड़ों में,
शैलों की फटी दरारों में |


'होकर समृद्धि-सुख के अधीन,
मानव होता नित तप: क्षीण,
सत्ता, किरीट, मणिमय आसन,
करते मनुष्य का तेज-हरण.

नर विभव हेतु लालचाता है,
पर वही मनुज को खाता है |


'चाँदनी, पुष्प-छाया में पल,
नर भले बने सुमधुर, कोमल,
पर अमृत क्लेश का पिये बिना,
आतप अंधड़ में जिये बिना,

वह पुरुष नहीं कहला सकता,
विघ्नों को नहीं हिला सकता |


'उड़ते जो झंझावतों में,
पीते जो वारि प्रपातों में,
सारा आकाश अयन जिनका,
विषधर भुजंग भोजन जिनका,

वे ही फणिबंध छुड़ाते हैं,
धरती का हृदय जुड़ाते हैं |


'मैं गरुड़ कृष्ण ! मैं पक्षिराज,
सिर पर ना चाहिए मुझे ताज |
दुर्योधन पर है विपद घोर,
सकता न किसी विधि उसे छोड़,

रण-खेत पाटना है मुझको,
अहिपाश काटना है मुझको”
Ramdhari Singh 'Dinkar', रश्मिरथी

Munshi Premchand
“हम जिनके लिए त्याग करते हैं उनसे किसी बदले की आशा न रखकर भी उनके मन पर शासन करना चाहते हैं, चाहे वह शासन उन्हीं के हित के लिए हो, यद्यपि उस हित को हम इतना अपना लेते हैं कि वह उनका न होकर हमारा हो जाता है। त्याग की मात्रा जितनी ही ज़्यादा होती है, यह शासन-भावना भी उतनी ही प्रबल होती है और जब सहसा हमें विद्रोह का सामना करना पड़ता है, तो हम क्षुब्ध हो उठते हैं, और वह त्याग जैसे प्रतिहिंसा का रूप ले लेता है।”
Munshi Premchand, गोदान [Godan]

194297 Sir Walter Scott Appreciation — 23 members — last activity Aug 01, 2021 01:41PM
How many novels by Sir Walter Scott have you read? If you are a serious reader of classics of the 19th century and like good stories with history, rom ...more
year in books
Ashish ...
1,999 books | 865 friends

Ashish ...
1,213 books | 916 friends

Anusha ...
4,772 books | 497 friends

Rahul S...
1,014 books | 139 friends

Princes...
1,684 books | 884 friends

Shefali...
1,780 books | 101 friends

Asha Seth
1,168 books | 441 friends

Alan
477 books | 1,857 friends

More friends…
The White Tiger by Aravind AdigaIgnited Minds by A.P.J. Abdul Kalam
Indian Books - Fiction
1,128 books — 2,463 voters




Polls voted on by Prince

Lists liked by Prince